. Sri Dasam Granth Sahib Verse
SearchGurbani.com

Sri Dasam Granth Sahib Verse

ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚਾਚਰੀ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

CHACHARI STANZA. BY THY GRACE

चाचरी छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਤੇਰਾ ਜੋਰੁ ॥

ALL THY MIGHT.

तेरा जोरु ॥


ਚਾਚਰੀ ਛੰਦ ॥

CHACHARI STANZA

चाचरी छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA,

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚਰਪਟ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

CHARPAT STANZA. BY THY GRACE

चरपट छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਰੂਆਲ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ROOALL STANZA. BY THY GRACE

रूआल छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

MADHUBHAR STANZA. BY THY GRACE

मधुभार छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਚਾਚਰੀ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

CHACHARI STANZA BY THY GRACE

चाचरी छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚਾਚਰੀ ਛੰਦ ॥

CHACHARI STANZA

चाचरी छंद ॥


ਭਗਵਤੀ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ਕਥਤੇ ॥

BHAGVATI STANZA. UTTERED WITH THY GRACE

भगवती छंद ॥ त्वप्रसादि कथते ॥


ਚਾਚਰੀ ਛੰਦ ॥

CHACHARI STANZA

चाचरी छंद ॥


ਚਰਪਟ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

CHARPAT STANZA. BY THE GRACE

चरपट छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

RASAAVAL STANZA. BY THY GRACE

रसावल छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਭਗਵਤੀ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

BHAGVATI STANZA. BY THY GRACE

भगवती छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

MADHUBHAR STANZA. BY THY GRACE.

मधुभार छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਹਰਿਬੋਲਮਨਾ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

HARIBOLMANA STANZA, BY THE GRACE

हरि बोल मना छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਏਕ ਅਛਰੀ ਛੰਦ ॥

EK ACHHARI STANZA

एक अछरी छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਅਕਾਲ ਉਸਤਤਿ ॥

EULOGY OF THE NON-TEMPORAL LORD

अकाल उसतति


ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

The Lord is One and he can be attained through the grace of the True Guru.

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

The Lord is One and he can be attained through the grace of the True Guru.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਉਤਾਰ ਖਾਸੇ ਦਸਖਤ ਕਾ ॥

Copy of the manuscript with exclusive signatures of

उतार खासे दसखत का ॥


ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

The Tenth Sovereign.

पातिसाही १० ॥


ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਕੀ ਰਛਾ ਹਮਨੈ ॥

The non-temporal Purusha (All-Pervading Lord) is my Protector.

अकाल पुरख की रछा हमनै ॥


ਸਰਬ ਲੋਹ ਕੀ ਰਛਿਆ ਹਮਨੈ ॥

The All-Steel Lord is my Protector.

सरब लोह की रछिआ हमनै ॥


ਸਰਬ ਕਾਲ ਜੀ ਦੀ ਰਛਿਆ ਹਮਨੈ ॥

The All-Destroying Lord is my Protector.

सरब काल जी दी रछिआ हमनै ॥


ਸਰਬ ਲੋਹ ਜੀ ਦੀ ਸਦਾ ਰਛਿਆ ਹਮਨੈ ॥

The All-Steel Lord is ever my Protector.

सरब लोह जी दी सदा रछिआ हमनै ॥


ਆਗੇ ਲਿਖਾਰੀ ਕੇ ਦਸਖਤ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

Then the signatures of the Author (Guru Gobind Singh).

आगै लिखारी के दसतखत ॥


ਚਉਪਈ ॥

BY THY GRACE QUATRAIN (CHAUPAI)

त्वप्रसादि ॥ चउपई ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਕਬਿਤ ॥

BY THY GRACE KABITT

त्वप्रसादि ॥ कबि्त ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਸ੍ਵੈਯੇ ॥

BY THY GRACE SWAYYAS

त्वप्रसादि ॥ स्वये ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE. TOMAR STANZA

त्वप्रसादि ॥ तोमर छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਲਘੁ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE. LAGHU NIRAAJ STANZA

त्वप्रसादि ॥ लघू निराज छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਕਬਿਤੁ ॥

BY THY GRACE KABITT

त्वप्रसादि ॥ कबि्त ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE. BHUJANG PRAYAAT STANZA

त्वप्रसादि ॥ भुजंग प्रयात छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE PAADGARI STANZA !

त्वप्रसादि ॥ पाधड़ी छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE TOTAK STANZA !

त्वप्रसादि ॥ तोटक छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE. NARAAJ STANZA

त्वप्रसादि ॥ नराज छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਰੂਆਮਲ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE. ROOALL STANZA

त्वप्रसादि ॥ रूआल छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਦੋਹਰਾ ॥

BY THY GRACE. DOHRA (COUPLET)

त्वप्रसादि ॥ दोहरा ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਦੀਘਰ ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

BY TH GRACE DIRAGH TRIBGANGI STANZA

त्वप्रसादि ॥ दीरघ त्रिभंगी छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE PAADHARI STANZA

त्वप्रसादि ॥ पाधड़ी छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਸ੍ਵੈਯੇ ॥

BY THY GRACE. SWAYYAS

त्वप्रसादि ॥ स्वैये ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਕਬਿਤੁ ॥

BY THY GRACE KABITT

त्वप्रसादि ॥ कबि्त ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

BY THY GRACE PAADHARI STANZA

त्वप्रसादि ॥ पाधड़ी छंद ॥


ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

The Lord is One and He can be attained through the grace of the true Guru.

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥


ਅਥ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥

Now the Granth (Book) entitled ‘BACHITTAR NATAK’ is composed.

अथ बचित्र नाटक ग्रंथ लिखयते ॥


ਸ੍ਰੀ ਮੁਖਵਾਕ ਪਾਤਸਾਹੀ ੧੦ ॥

From the Holy Mouth of the Tenth King (Guru)

स्री मुखबाक पातशाही १० ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਦੋਹਰਾ ॥

BY THY GRACE. DOHRA

त्वप्रसादि ॥ दोहरा ॥


ਸ੍ਰੀ ਕਾਲ ਜੀ ਕੀ ਉਸਤਤਿ ॥

The Eulogy of the Revered Death (KAL).

स्री काल जी की उसतति ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHAGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA !

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA BY THY GRACE

रसावल छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA BY THY GRACE

तोटक छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भूजंग प्रयात छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA.

सवैया ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYYAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA.

सवैया ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸ੍ਰੀ ਕਾਲ ਜੀ ਕੀ ਉਸਤਤਿ ਪ੍ਰਿਥਮ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨੰ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧॥੧੦੧॥

Here ends the First Chapter of BACHITTAR NATAK entitled The Eulogy of Sri KAL.’1.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे स्री काल जी की उसतति प्रिथम धिआइ स्मपूरनं सतु सुभम सतु ॥१॥


ਕਵਿ ਬੰਸ ਵਰਣਨ ॥

AUTOBIOGRAPHY

कवि बंस वरनण ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI.

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸੁਭ ਬੰਸ ਬਰਨਨੰ ਦੁਤੀਯਾ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੨॥੧੩੭॥

End of the Second Chapter of BACHITTAR NATAK entitled ‘The Description of Ancestry’.2.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे सुभ बंस बरननं नाम दुतीआ धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥२॥अफजूं॥१३७॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

CHHAPAI STANZA

छपै छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਲਵੀ ਕੁਸੀ ਜੁਧ ਬਰਨਨੰ ਤ੍ਰਿਤੀਆ ਧਿਆਉ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੩॥੧੮੯॥

End of the Third Chapter of BACHITTAR NATAK entitled The Description of the War of the Descendants of LAVA KUSHA.3.189.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे लवी कुसी जु्ध बरननं नाम त्रितीआ धिआइ समापतम सत सुभम सतु ॥३॥अफजूं॥१८९॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਅੜਿਲ ॥

ARIL

अड़िल ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਬੇਦ ਪਾਠ ਭੇਟ ਰਾਜ ਚਤੁਰਥ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੪॥੧੯੯॥

End of the Fourth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled “The Recitation of the Vedas and the Offering of Kingdom”.4.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे बेद पाठ भेट राज चतुरथ धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥४॥अफजूं॥१९९॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਪਾਤਸਾਹੀ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਪੰਚਮੋ ਧਿਆਉ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੫॥੨੧੫॥

End of the Fifth Chapter of BACHTTAR NATAK entitled ‘The Description of the Spiritual Kings (Preceptors).5.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे पातशाही बरननं नाम पंचमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥५॥अफजूं॥२१५॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਬਾਚ ਇਸ ਕੀਟ ਪ੍ਰਤਿ ॥

The Words of the Non-temporal Lord to this insect:

अकाल पुरख बाच इस कीट प्रति ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਬਾਚ ॥

The Word of the Non-Temporal Lord:

अकाल पुरख बाच ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਕਬਿਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

The World of the Poet: DOHRA

कबिबाच ॥ दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPI

चौपई ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NAARAAJ CHHAND

नराज छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHUPAI

चौपई ॥


ਕਬਿਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

The Words of the Poet: DOHRA

कबिबाच ॥ दोहरा ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਮਮ ਆਗਿਆ ਕਾਲ ਜਗ ਪ੍ਰਵੇਸ ਕਰਨੰ ਨਾਮ ਖਸਟਮੋ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੬॥੨੭੯॥

End of the Sixth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled The Command of Supreme KAL to Me for Coming into the World.6.279.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे मम आगिआ काल जग प्रवेस करनं नाम खसटमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥६॥अफजूं॥२७९॥


ਅਥ ਕਬਿ ਜਨਮ ਕਥਨੰ ॥

HERE BEGINS THE DESCRIPTION OF THE BIRTH OF THE POET.

अथ कबि जनम कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕਬਿ ਜਨਮ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਸਪਤਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਤਪਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੭॥੨੮੨॥

End of the Seventh Chapter of BACHITTTAR NATAK entitled Description of the Poet.7.282

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कबि जनम कथनं नाम सपतमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥७॥अफजूं॥२८२॥


ਅਥ ਰਾਜ ਸਾਜ ਕਥਨੰ ॥

Here begins the Description of the Magnificence of Authority:

अथ राज साज कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਰਾਜ ਸਾਜ ਕਥਨੰ ਭੰਗਾਣੀ ਜੁਧ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਅਸਟਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੮॥੩੨੦॥

End of the Eighth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled ‘Description of the Battle of Bhangani.’8.320.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे भंगाणी जु्ध बरननं नाम असटमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥८॥अफजूं॥३२०॥


ਅਥ ਨਉਦਨ ਕਾ ਜੁਧ ਬਰਨਨੰ ॥

Here begins the Description of the Battle of Nadaun:

अथ नदउण का जु्ध बरननं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥

MADHUBHAAR STANZA

मधुभार छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਛੰਦ ॥

BHUJANG STANZA

भुजंग छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਨਦੌਨ ਜੁਧ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਨੌਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੯॥੩੪੪॥

End of Ninth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled ‘Description of the battle of Nadaun.9.344.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे नदौन जु्ध बरननं नाम नौमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥९॥३४४॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਖਾਨਜਾਦੇ ਕੋ ਆਗਮਨ ਤ੍ਰਾਸਿਤ ਉਠ ਜੈਬੋ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਦਸਮੋ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੦॥੩੫੪॥

End of the Tenth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled ‘Description of the Expedition of Khanzada and his flight out of fear’.10.354.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे खानजादे को आगमन त्रासित उठ जैबो बरननं नाम दसमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१०॥३५४॥


ਹੁਸੈਨੀ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

The Description of the Battle with HUSSAINI:

हुसैनी जु्ध कथनं ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥

MADHUBHAAR STANZA

मधुभार छंद ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUYANG STAZA

भुयंग छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PAADHARI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG STANZA

भुजंग परयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗੰਥੇ ਹੁਸੈਨ ਬਧਹ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਹਿੰਮਤ ਸੰਗਤੀਆ ਬਧ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਗਿਆਰਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੧॥ਅਫਜੂ॥੪੨੩॥

End of Eleventh Chapter of BACHITTAR NATAK entitled Description of the Killing of Hussaini and also the Killing of Kirpal, Himmat and Sangatia.11.423

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे हुसैनी बध क्रिपाल हिमत संगतीआ बध बरननं नाम गिआरमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥११॥अफजूं॥४२३॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਜੁਝਾਰ ਸਿੰਘ ਜੁਧ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਦ੍ਵਾਦਸਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੨॥੪੩੫॥

End of the Twelfth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled Description of the battle with Jujhar Singh.12.435

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे जुझार सिंघ जुध बरननं नाम द्वादसमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१२॥अफजूं॥४३५॥


ਸਹਜਾਦੇ ਕੋ ਆਗਮਨ ਮਦ੍ਰ ਦੇਸ ॥

The arrival of Shahzada (the prince) in Madra Desha (Punjab):

सहजादे को आगमन मद्र देस ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAPAI

चौपई ॥


ਚਾਰਣੀ ਦੋਹਿਰਾ ॥

CHAARNI. DOHRA

चारणी ॥ दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸਾਹਜਾਦੇ ਵ ਅਹਦੀ ਆਗਮਨ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਤ੍ਰੋਦਸਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੩॥੪੬੦॥

End of the Thirteenth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled ‘Description of the Arrival of Shahzada (the Prince) and the Officers’.13.460

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे शाहज़ादे व अहदी आगमन बरननं नाम त्रौदसमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१३॥अफजूं॥४६०॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸਰਬ ਕਾਲ ਕੀ ਬੇਨਤੀ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਚੌਦਸਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੪॥੪੭੧॥

End of Fourteenth Chapter of BACHITTAR NATAK entitled ‘Description of the Supplication to the Lord, Destroyer of All’.14.471.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे सरब काल की बेनती बरननं नाम चौदसमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१४॥अफजूं॥४७१॥


ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ (ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ) ॥

NAME OF THE BANI.

चंडी चरित्र (उकति बिलास)


ੴ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹਿ ॥

The Lord is one and the Victory is of the Lord.

ੴ वाहिगुरू जी की फतहि ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਅਥ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥

New begin the extraordinary feats from the Life of Chandi:

अथ चंडी चरित्र उकति बिलास लिखयते ॥


ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

पातसाही १० ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਪੁਨਹਾ ॥

PUNHA

पुनहा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਮੁਨੀਸੁਰੋਵਾਚ ॥

The Great Sage said:

मुनीसरो वाच ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA

सोरठा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਨੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਮਧੁ ਕੈਟਭ ਬਧਹਿ ਪ੍ਰਥਮ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧॥

End of the First Chapter of ‘The Killing of Madhu and Kaitabh’ as described in CHANDI CHARITRA UKATI of Markandeya Purana.1.

इति स्री मारकंडे पुराने चंडी चरित्र उकति बिलास मधकैटभ बधहि प्रथम धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१॥


ਪੁਨਹਾ ॥

PUNHA

पुनहा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਰੇਖਤਾ ॥

REKHTA

रेखता ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT,

कबितु ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਨੇ ਸ੍ਰੀ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਮਹਖਾਸੁਰ ਬਧਹਿ ਨਾਮ ਦੁਤੀਆ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੨॥

End of the Second Chapter entitled ‘The Killing of Mahishasura’ as recorded in CHANDI CHARTRA UKATI BILAS of Markandeya Purana. 2.,

इति स्री मारकंडे पुराने स्री चंडी चरित्र उकति बिलास महखासुर बधहि नाम दुतीआ धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥२॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA,

सोरठा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT,

कबितु ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਣੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਧੂਮ੍ਰ ਨੈਨ ਬਧਹਿ ਨਾਮ ਤ੍ਰਿਤੀਆ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੩॥

End of the Third Chapter entitled ‘Slaying of Dhumar Lochan’ of CHANDI CHARITRA UKATI BILAS in Markandeya Purana. 3.,

इति स्री मारकंडे पुराने स्री चंडी चरित्र उकति बिलास धूम्र नैन बधहि नाम त्रितीआ धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥३॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਸ੍ਰੀ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਚੰਡ ਮੁੰਡ ਬਧਹਿ ਚਤ੍ਰਥ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੪॥

End of the Fourth Chapter entitled ‘Slaying of Chand Mund’ of SRI CHANDI CHARITRA in Markandeya Purana.4.,

इति स्री बचित्र नाटके स्री चंडी चरित्रे चंड मुंड बधहि चत्रथ धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥४॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA,

सोरठा ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA,

सोरठा ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA.,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA,

सोरठा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA,

सोरठा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਨੇ ਸ੍ਰੀ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਰਕਤ ਬੀਜ ਬਧਹਿ ਨਾਮ ਪੰਚਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੫॥

End of the fifth Chapter entitled ‘Killing of Raktavija’ in SRI CHANDI CHARITRA UKATI BILAS of Markandeya Purana.5.,

इति स्री मारकंडे पुराने स्री चंडी चरित्र उकति बिलास रकत बीज बधहि नाम पंचमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥५॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT,

कबितु ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਨੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਨਿਸੁੰਭ ਬਧਹਿ ਖਸਟਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥੬॥

End of the Sixth Chapter entitled ‘Slaying of Nisumbh’ in CHANDI CHARITREA UKATI BILAS of Mardandeya Purana.6.,

इति स्री मारकंडे पुराने चंडी चरित्र उकति बिलास निसु्मभ बधहि खसटमो धिआइ समापतम ॥६॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT,

कबितु ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA,

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA,

स्वैया ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਣੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਸੁੰਭ ਬਧਹਿ ਨਾਮ ਸਪਤਮੋ ਧਿਆਯ ਸੰਪੂਰਨੰ ॥੭॥

End of the Seventh Chapter entitled ‘Slaying of Sumbh’ in CHANDI CHARITRA of Markandeya Purana.7.,

इति स्री मारकंडे पुराने चंडी चरित्रे सु्मभ बधहि नाम सपतमो धिआइ स्मपूरनं ॥७॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA.,

स्वैया ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KAVIT

कवितु ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KAVIT

कवितु ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਨੇ ਸ੍ਰੀ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਦੇਵ ਸੁਰੇਸ ਸਹਿਤ ਜੈਕਾਰ ਸਬਦ ਕਰਾ ਅਸਟਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੮॥

इति स्री्र मारकंडे पुराने स्री चंडी चरित्रो उकति बिलास देव सुरेस सहित जैकार सबद करा असटमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥८॥


ੴ ਸ੍ਰੀ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹ ॥

ੴ वाहिगुरू जी की फ़तह ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

The Lord is one and the Victory is of the Lord.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਅਥ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥

CHANDI CHARITRA IS NOW COMPOSED

अथ चंडी चरित्र लिखयते ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥

MADHUBHAAR STANZA

मधुभार छंद ॥


ਰੂਆਮਲ ਛੰਦ ॥

ROOAAL STANZA

रूआमल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਬਧਹ ਪ੍ਰਥਮ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨੰਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧॥

Here ends the First Chapter entitled ‘Killing of Mahishasura’ of Chandi Charitra in BACHITTAR NATAK.1.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे महिखासुर बधह प्रथम धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥१॥


ਅਥ ਧੂਮਨੈਨ ਜੁਧ ਕਥਨ ॥

Here begins the description of the war with Dhumar Nain :

अथ धूम्रनैन जुध कथनं ॥


ਕੁਲਕ ਛੰਦ ॥

KULAK STANZA

कुलक छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਧੂਮ੍ਰਨੈਨ ਬਧਤ ਦੁਤੀਆ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੨॥

Here ends the Second Chapter entitled ‘Killing of Dhumar Nain’, which forms part of Chandi Charitra of BACHITTAR NATAK.2.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे धूम्रनैण बधत दुतीआ धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥२॥


ਅਥ ਚੰਡ ਮੁੰਡ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

Now the battle with Chand and Mund is described:

अथ चंड मुंड जुध कथनं ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਰੂਆਲ ਛੰਦ ॥

ROOAAL STANZA

रूआल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਚੰਡ ਮੁੰਡ ਬਧਹ ਤ੍ਰਿਤਯੋ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤ ॥੩॥

Here ends the Third Chapter entitled ‘Killing of Chad and Mund’ of Chandi Charitra in BACHITTAR NATAK.3.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे चंड मुंड बधह त्रितीयो धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥३॥


ਅਥ ਰਕਤ ਬੀਰਜ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

Now the war with Rakat Biraj is described:

अथ रकत बीरज जुध कथनं ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORATHA

सोरठा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਬਿਜੈ ਛੰਦ

BIJAI STANZA

बिजै छंद ॥


ਮਨੋਹਰ ਛੰਦ

MANOHAR STANZA

मनोहर छंद ॥


ਸੰਗੀਤ ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ

SANGEET BHUJANG PRAYAAT STANZA

संगीत भुजंग प्रयात छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਰਕਤ ਬੀਰਜ ਬਧਹ ਚਤੁਰਥ ਧਿਆਯ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੪॥

Thus the Fourth Chapter entitled “The Killing of Rakat Beej” of Chandi Charitra of BACHITTAR is completed.4.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे रकत बीरज बधह चतुरथ धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥४ ॥


ਅਥ ਨਿਸੁੰਭ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

Now the battle with Nisumbh is described:

अथ निसु्मभ जुध कथनं ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भूजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਬੇਲੀ ਬਿੰਦ੍ਰਮ ਛੰਦ ॥

BELI BINDRAM STANZA

बेली बिंद्रम छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥

MADHUBHAAR STANZA

मधुभार छंद ॥


ਬ੍ਰਿਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BIRADH NIRAAJ STANZA

बिरध नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਨਿਸੁੰਭ ਬਧਹ ਪੰਚਮੋ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੫॥

Here ends the Fifth Chapter entitled ‘The Killing of Nisumbh’ of Chandi Charitra in BACHITTAR NATAK.5.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे निसु्मभ बधह पंचमो धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥५ ॥


ਅਥ ਸੁੰਭ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

Now the war with Sumbh is described:

अथ सु्मभ जुध कथनं ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਸੰਗੀਤ ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥

SANGEET MADHUBHAAE STANZA

संगीत मधुभार छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਸੰਗੀਤ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

SANGEET NARAAJ STANZA

संगीत नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPI

चउपई ॥


ਮਧੁਭਾਰ ਛੰਦ ॥

MADHUBHAAR STANZA

मधुभार छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਬੇਲੀ ਬਿਦ੍ਰਮ ਛੰਦ ॥

BELI BINDRAM STNZA

बेली बिंद्रम छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਸੁੰਭ ਬਧਹ ਖਸਟਮੋ ਧਿਆਯ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੬॥

Here ends the Sixth Chapter entitled ‘The Killing of Sumbh’ of Chandi Charitra in BACHITTAR NATAK.6.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे सु्मभ बधह खसटमो धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥६॥


ਅਥ ਜੈਕਾਰ ਸਬਦ ਕਥਨੰ ॥

NOW THE WORDS OF VICTORY ARE RELATED:

अथ जैकार सबद कथनं ॥


ਬੇਲੀ ਬਿਦ੍ਰਮ ਛੰਦ ॥

BELI BINDRAM STANZA

बेली बिंद्रम छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤਿ ॥

Eulogy of the Goddess:

देवी जू की उसतति ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਸਪਤਮੋ ਧਿਆਯ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੭॥

Here ends the Seventh Chapter entitled ‘The Eulogy of the Goddess’ of Chandi of Chandi Charitra in BACHITTAR NATAK.7.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे देवी जू की उसतति बरननं नाम सपतमो धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥७॥


ਅਥ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਸਤਤ ਬਰਨਨੰ ॥

Description of the Praise of Chandi Charitra:

अथ चंडी चरित्र उसतत बरननं ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਸਤਤਿ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਅਸਟਮੋ ਧਿਆਯ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੮॥

Here ends the Eighth Chapter entitled ‘Description of the Praise of Chandi Charitra’ in BACHITTAR NATAK.8.

इति स्री बचित्र नाटके चंडी चरित्रे चंडी चरित्र उसतति बरननं नाम असटमो धिआइ स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥८॥


ਵਾਰ ਦੁਰਗਾ ਕੀ ॥

NAME OF THE BANI.

चंडी दी वार


ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

The Lord is one and the Victory is of the Lord.

ੴ वाहिगुरू जी की फतह ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

May SRI BHAGAUTI JI (The Sword) be Helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਅਥ ਵਾਰ ਦੁਰਗਾ ਕੀ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥

The Heroic Poem of Sri Bhagauti Ji (Goddess Durga).

वार स्री भगउती जी की ॥


ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

(By) TheTenth King (Guru).

पातसाही १० ॥


ਪਉੜੀ ॥

PAURI

पउड़ी ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਪਉੜੀ ॥

PAURI

पउड़ी ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦੁਰਗਾ ਕੀ ਵਾਰ ਸਮਾਪਤੰ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री दुरगा की वार समापतं सतु सुभम सतु


ਗਿਆਨ ਪ੍ਰਬੋਧ ॥

NAME OF THE BANI.

गिआन प्रबोध


ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

The Lord is one, He can be realized by the grace of the True Guru.

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let the Lord (The Primal Lord, who known as Sri Bhagauti Ji—The Primal Mother) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਅਥ ਗਿਆਨ ਪ੍ਰਬੋਧ ਗ੍ਰੰਥ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥

Thus the book named GYAN PRABODH (Unforldment of Knowledge) is being written.

अथ गिआन प्रबोध ग्रंथ लिखयते ॥


ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

Gyan Prabodh of Tenth Sovereign (Guru).

पातशाही १० ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA BY THY GRACE.

भुजंग प्रयात छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

TRIBHANGI STANZA : BY THY GRACE

त्रि्रभंगी छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਕਲਸ ॥

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

कलस ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

CHAPAI STANZA

छपै छंद ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

CHHAPAI STANZA : BY THY GRACE

छपै छंद ॥ त्व प्रसाइ ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

CHHAPAI STANZA

छपै छंद ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

CHHAPAI STANZA : BY THY GRACE

छपै छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਕਬਿਤੁ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

KABIT : BY THY GRACE

कबितु ॥ त्वप्रसादि ॥


ਬਹਿਰ ਤਵੀਲ ਛੰਦ ॥ ਪਸਚਮੀ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

BAHIR TAVEEL STANZA, PASCHAMI, BY THY GRACE

बहिर तवील छंद ॥ पसचमी ॥ त्वप्रसादि ॥


ਅਰਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ARDH NARAAJ STANZA: BY THY GRACE

अरध नराज छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਨਿਰਾਜ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

NARRAJ STNZA BY THY GRACE

नराज छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਬ੍ਰਿਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BRIDH NARAAJ STANZA

ब्रिध नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

PAADHRAI STANZA BY THY GRACE

पाधड़ी छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਪਰਾਤਮਾ ਬਾਚ ॥

The Higher Soul said:

परातमा बाच ॥


ਰੂਆਲ ਛੰਦ ॥

ROOAAL STANZA

रूआल छंद ॥


ਪ੍ਰਿਥਮ ਜਗ ਸਮਾਪਤਿਹ ॥

Here ends the First Sacrifice.

प्रिथम ज्ग समापतहि ॥


ਸ੍ਰੀ ਬਰਣ ਬਧਹ ॥

The Slaying of Sri Baran:

स्री बरण बधह ॥


ਸ੍ਰੀ ਗਿਆਨ ਪ੍ਰਬੋਧ ਪੋਥੀ ਦੁਤੀਆ ਜਗ ਸਮਾਪਤੰ ॥

This is the end of the Second Sacrifice in the book entitled SRI GYAN PRABODH.

स्री गिआन प्रबोध पोथी दुतीआ जग समापतं ॥२॥


ਅਥ ਰਾਜਾ ਪ੍ਰੀਛਤ ਕੋ ਰਾਜ ਕਥਨੰ ॥

Here begins the Description of the Rule of the King Parikshat :

अथ राजा प्रीछत को राज कथनं ॥


ਰੁਆਲ ਛੰਦ ॥

ROOAAL STANZA

रूआल छंद ॥


ਇਤਿ ਰਾਜਾ ਪ੍ਰੀਛਤ ਸਮਾਪਤੰ ਭਏ ਰਾਜਾ ਜਨਮੇਜਾ ਰਾਜ ਪਾਵਤ ਭਏ ॥

The end of the Episode of King Parikshat.The Rule of King Janmeja begins :

इति राजा प्रीछत समापतं भए ॥ राजा जनमेजा राज पावत भए ॥


ਰੂਆਲ ਛੰਦ ॥

ROOAAL STANZA

रूआल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਇਤਿ ਜਨਮੇਜਾ ਸਮਾਪਤ ਭਇਆ ॥

Thus the king Janmeja breathed his last.

इति जनमेजा समापत भइआ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPI

चउपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPI

चउपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चउपई ॥


ਦਿਜੋ ਬਾਚ ॥

The Brahmin said:

दिजो वाच ॥


ਰਾਜਾ ਬਾਚ ॥

The king said:

राजा वाच ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਇਤਿ ਅਜੈ ਸਿੰਘ ਕਾ ਰਾਜ ਸੰਪੂਰਨ ਭਇਆ ॥

Here ends the complete Description of the Rule of Ajai Singh.

इति अजै सिंघ का राज स्मपूरन भइआ ॥


ਜਗਰਾਜ ॥ ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

The King Jag: TOMAR STANZA BY THY GRACE

जग राज ॥ तोमर छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਇਤਿ ਪੰਚਮੋ ਰਾਜ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

Here ends the Description of the Benign Rule of the Fifth King.

अथ पंचमो राज समापतम सतु सुभम सतु ॥


ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

TOMAR STANZA BY THY GRACE

तोमर छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਰੂਆਲ ਛੰਦ ॥ ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ROOAAL STANZA BY THE GRACE

रूआल छंद ॥ त्वप्रसादि ॥


ਗਿਆਨ ਪ੍ਰਬੋਧ ਸੰਪੂਰਨ ॥

गिआन प्रबोध स्मपूरन ॥


ਚੌਬੀਸ ਅਵਤਾਰ ॥

(VISNU’S TWENTY-FOUR INCARNATIONS.

चौबीस अउतार ॥


ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

The Lord One and the Victory is of the Lord.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

ੴ स्री वाहिगुरू जी की फ़तह ॥


ਅਥ ਚਉਬੀਸ ਅਉਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

(VISNU’S TWENTY-FOUR INCARNATIONS.

अथ चउबीस अउतार कथनं ॥


ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

By the Tenth King (Guru).

पातिसाही १० ॥


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਚੌਪਈ ॥

BY THY GRACE CHAUPAI

त्वप्रसादि ॥ चौपई ॥


ਅਥ ਪ੍ਰਥਮ ਮਛ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the first Machh Incarnation

अथ प्रथम म्छ अवतार कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग छंद ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਮਛ ਪ੍ਰਥਮ ਅਵਤਾਰ ਸੰਖਾਸੁਰ ਬਧਹ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧॥

End of the description of the first Machh (fish) Incarnation and Killing of Shankhasura in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे मछ प्रथम अवतार संखासुर समापतम सतु सुभम सतु ॥१॥


ਅਥ ਕਛ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Kachh (Tortoise) Incarnation:

अथ क्छ अउतार कथनं ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕਛੁ ਦੁਤੀਆ ਅਉਤਾਰ ਬਰਨਨੰ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੨॥

End of the description of the second Kachh (tortoise), incarnation in BACHITTAR NATAK.2.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे दुतीआ कछ अउतार बरननं स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥२॥


ਅਥ ਛੀਰ ਸਮੁੰਦ੍ਰ ਮਥਨ ਚਉਦਹ ਰਤਨ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the Churing of the Milkocean and the Fourteen Jewels:

अथ छीर समुंद्र मथन चउदह रतन कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Shri Bhagauti Ji (The Primal Power) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਉਪਧਾਤ ਕਥਨੰ ॥

Updhat Description:

उपधात कथनं ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਅਥ ਨਰ ਨਾਰਾਇਣ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Here begins the description of the incarnations named Nar and Narayan:

अथ नर नाराइण अवतार कथनं ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਨਰ ਨਾਰਾਇਣ ਅਵਤਾਰ ਚਤੁਰਥ ਸੰਪੂਰਨੰ ॥੪॥

End of the description of the third incarnation of NAR and the fourth incarnation of NARAYAN in BACHITTAR NATAK.3.4.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे नर त्रितीय अते नाराइण चतुरथ अवतार स्मपूरनं ॥३॥४॥


ਅਥ ਮਹਾ ਮੋਹਨੀ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Maha Mohini Incarnation:

अथ महा मोहनी अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਗ੍ਰੰਥੇ ਮਹਾਮੋਹਨੀ ਪੰਚਮੋ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੫॥

End of the description of the fifth incarnation MAHA MOHNI in BACHITTAR NATAK.5.

इति स्री बचित्र नाटके ग्रंथे महा मोहनी पंचमो अवतार स्मपूरनं ॥५॥


ਅਥ ਬੈਰਾਹ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the Boar Incarnation:

अथ बैराह अवतार कथनं ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਬੈਰਾਹ ਖਸਟਮ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੬॥

End of the description of the sixth BOAR INCARNATION in BACHITTAR NATAK.6.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे बैराह खसटम अवतार बैराह समापतम सतु सुभम सतु ॥६॥


ਅਥ ਨਰਸਿੰਘ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Narsingh Incarnation:

अथ नरसिंघ अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Shri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਪਾਧਰੀ ਛੰਦ ॥

PADHRI STANZA

पाधरी छंद ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਬੇਲੀ ਬ੍ਰਿੰਦਮ ਛੰਦ ॥

BELI BINDRAM STANZA

बेली बिंद्रम छंद ॥


ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

TOMAR STANZA

तोमर छंद ॥


ਦੋਧਕ ਛੰਦ ॥

DODHAK STANZA

दोधक छंद ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਪਾਧਰੀ ਛੰਦ ॥

PAADHARI STANZA

पाधरी छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਨਰਸਿੰਘ ਸਪਤਮੋ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੭॥

End of the description of the seventh incarnation of NARSINGH.7.

नरसिंघ सपतमो अवतार समापतं ॥७॥


ਅਥ ਬਾਵਨ ਅਵਤਾਰ ਬਰਨੰ ॥

Now begins the description of Bawan (Vaman) Incarnation:

अथ बावन अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpfrul.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸੁਕ੍ਰੋਬਾਚ ॥

Shukracharya said :

सु्क्रोबाच ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

TOMAR STANZA

तोमर छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਬਾਵਨ ਅਸਟਮੋ ਅਵਤਾਰ ਬਲਿ ਛਲਨ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੮॥

End of the description of VAMAN, the eighth incarnation of Vishnu and the deception of the king BALI in BACHITTAR NATAK.8.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे बावन अवतार असटमो कथनं ॥८॥ बल छलन समापतम सत ॥


ਅਥ ਪਰਸਰਾਮ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Parashuram Incarnation:

अथ परसराम अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਨਵਮੋ ਅਵਤਾਰ ਪਰਸਰਾਮ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੯॥

End of the description of the ninth incarnation PARASHURAMA in BACHITTAR NATAK.9.

इति स्री बचित्र नाटके नवमो अवतार परसराम समापतम सतु सुभम सतु ॥


ਅਥ ਬ੍ਰਹਮਾ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Brahma Incarnation:

अथ ब्रहमा अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਦਸਮੋ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੦॥

End of the description of the tenth incarnation BRAHMA in BACHITTAR NATAK.10.

इति स्री बचित्र नाटके ब्रहमा दसमो अवतार समापतम सतु सुभम सतु ॥१०॥


ਅਥ ਰੁਦ੍ਰ ਅਵਤਾਰ ਬਰਨਨੰ ॥

Now begins the description of Rudra Incarnation:

अथ रुद्र अवतार बरननं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਪਾਧਰੀ ਛੰਦ ॥

PADHAARI STANZA

पाधरी छंद ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਰੁਆਮਲ ਛੰਦ ॥

RUAAMAL STANZA

रुआमल छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

नराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਅੜਿਲ ॥

ARIL

अड़िल ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਪਿਨਾਕਿ ਪ੍ਰਬੰਧਹਿ ਅੰਧਕ ਬਧਹਿ ਰੁਦ੍ਰੋਸਤਤਿ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੦॥

End of the description of the killing of the demon ANDHAK and the Eulogy of SHIVA in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके पिनाकि परबंधहि अंधक बधहि रुद्रोसतति धिआइ समापतम सतु सुभम सतू ॥१०॥


ਅਥ ਗਉਰ ਬਧਹ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the killing of Parbati:

अथ गउर बधह कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਬ੍ਰਿਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BRIDH NARAAJ STANZA

ब्रिध नराज छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਬ੍ਰਿਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BRIDH NARAAJ STANZA

ब्रिध नराज छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਰੁਦ੍ਰ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦਛ ਬਧਹੀ ਰੁਦ੍ਰ ਮਹਾਤਮੇ ਗਉਰ ਬਧਹ ਗਿਆਰਵੋ ਅਵਤਾਰ ਸੰਪੂਰਣਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੧॥

End of the description of the Killing of Daksha, the greatness of rudra and the Killing of Gauri (Parvati) in the Rudra incarnation.11.

इति स्री रुद्र प्रबंध द्छ बधह रुद्र महातमे गउर बधह ॥ धिआइ यारां स्मपूरनम सतु सुभम सतु ॥११॥


ਅਥ ਜਲੰਧਰ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Jalandhar incarnation:

अथ जलंधर अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी महाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਜਲੰਧੁਰ ਬਾਚ ॥

Jalandhar said :

जलंधर बाच ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਨਾਰਦ ਬਾਚ ॥

Narada said :

नारद बाच ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਜਲੰਧਰ ਅਵਤਾਰ ਬਾਰ੍ਹਵਾਂ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੨॥

End of the description of the twelfth i.e. JALANDHAR Incarnation.12.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे जलंधर अवतार बा्रहवां समापतम सत सुभम सत ॥१२॥


ਅਥ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the thirteenth i.e. VISHNU Incarnatiion:

अथ बिसनु अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Power) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਤੇਰ੍ਹਵਾ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤ ॥੧੩॥

End of the description of the thirteenth incarnation i.e.VISHNU .13.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे तेरवां बिसन अवतार समापतम सत सुभम सत ॥१३॥


ਅਥ ਮਧੁ ਕੈਟਬ ਬਧਨ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the killing of Madhu and Kaitabh :

अथ मधु कैटभ बध कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਮਧੁ ਕੈਟਭ ਬਧਹ ਚਤਰਦਸਵੋ ਅਵਤਾਰ ਬਿਸਨੁ ਸਮਾਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੪॥

End of the description of the fourteenth incarnation.14.

इति स्री बचित्र नाटक गंथे मधु कैटभ बधह चत्रदसवों अवतार समापतं सतु सुभम सतु ॥१४॥


ਅਥ ਅਰਿਹੰਤ ਦੇਵ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the incarnation named Arhant Dev :

अथ अरिहंत देव अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhaguti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਅਰਹੰਤ ਪਦ੍ਰਸਵੋਂ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੫॥

End of the description of ARHANT, the fifteenth incarnation in BACHITTAR NATAK.15.

इति स्री बचित्र नाटक गंथे पंद्रसवों अरहंत अवतार समापतम सतु सुभम सतु ॥१५॥


ਅਥ ਮਨੁ ਰਾਜਾ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the incarnation named King Manu:

अथ मनु राजा अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI.

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਗ੍ਰੰਥੇ ਮਨੁ ਰਾਜਾ ਅਵਤਾਰ ਸੋਲ੍ਹਵਾ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੬॥

For this work, the king Manu was MANU, the sixteenth incarnation in BACHITTAR BATAK.16.

इति स्री बचित्र नाटके मनु राजा अवतार सोलवां समापतम सतु सुभम सतु ॥१६ ॥


ਅਥ ਧਨੰਤਰ ਬੈਦ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the incarnation named Dhanantar Vaid:

अथ धनंतर बैद अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਧਨੰਤ੍ਰ ਅਵਤਾਰ ਸਤਾਰਵਾਂ ॥੧੭॥ ਸੁਭਮ ਸਤ ॥

End of the description of the seventeenth incarnation named DHANANTAR in BACHITTAR NATAK.17.

इति स्री बचित्र ग्रंथे नाटके धनंत्र अवतार सता्रहवां समापतम ॥ सतु सुभम सत ॥१७॥


ਅਥ ਸੂਰਜ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the Suraj (Sun) Incarnation:

अथ सूरज अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਅਰਧ ਨਿਰਾਜ ਛੰਦ ॥

ARDH NIRAAJ STANZA

अरध निराज छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਅੜਿਲ ॥

ARIL

अड़िल ॥


ਅਨੁਭਵ ਛੰਦ ॥

ANBHAV STANZA

अनुभव छंद ॥


ਮਧੁਰ ਧੁਨਿ ਛੰਦ ॥

MADHUR DHUN STANZA

मधुर धुनि छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਅਰਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

ARDH NARAAJ STANZA

अरध नराज छंद ॥


ਬੇਲੀ ਬਿੰਦ੍ਰਮ ਛੰਦ ॥

BELI BINDRAM STANZA

बेली बिंद्रम छंद ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਸੂਰਜ ਅਵਤਾਰ ਅਸਟ ਦਸਮੋ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤ ॥੧੮॥

End of the description of the Eighteenth Incarnation SURAJ in BACHITTAR NATAK.18.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे सूरज असट दसमो अवतार समापतम सतु सुभम सतु ॥१८॥


ਅਥ ਚੰਦ੍ਰ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Chandra Incarnation:

अथ चंद्र अवतार कथनं ॥


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

Let Sri Bhaguti Ji (The Primal Lord) be helpful.

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਦੋਧਕ ਛੰਦ ॥

DODHAK STANZA

दोधक छंद ॥


ਦੋਧਕ ॥

DODHAK STANZA

दोधक ॥


ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

TOMAR STANZA

तोमर छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI.

चौपई ॥


ਇਤਿ ਚੰਦ੍ਰ ਅਵਤਾਰ ਉਨੀਸਵੋਂ ॥੧੯॥ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

End of the description of the Nineteenth Incarnation i.e. CHANDRA. 19.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे चंद्र अवतार उनीसवों समापतम सतु सुभम सतु ॥१९॥


ੴ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹ ॥

The Lord is One and the Victory is of the Lord.

ੴ वाहिगुरू जी की फतह ॥


ਅਥ ਬੀਸਵਾਂ ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description about Ram, the twentieth Incarnation:

अथ बीसवां राम अवतार कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਸਰਵਣ ਬਾਚਿ ॥

Speech of Shravan :

सरवण बाचि ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PADDHRAI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਦਿਜ ਬਾਚ ਰਾਜਾ ਸੋਂ ॥

The speech of the Brahmin addressed to the King :

दिज बाच राजा सों ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PADDHRAI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਰਾਜਾ ਬਾਚ ਦਿਜ ਸੋਂ ॥

The speech of the King addressed to the Brahmin:

राजा बाच दिज सों ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PADDHRAI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਦਿਜ ਬਾਚ ਰਾਜਾ ਸੋਂ ॥

The speech of the Brahmin addressed to the King :

दिज बाच राजा सों ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PADDHRAI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਰਾਜਾ ਬਾਚ ॥

The speech of the king:

राजा बाच ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PADDHRAI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਦੇਵ ਬਾਨੀ ਬਾਚ ॥

Speech of gods :

देव बानी बाच ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PADDHRAI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ STANZA

नराज छंद ॥


ਰੂਆਮਲ ਛੰਦ ॥

ROOAAMAL STANZA

रूआमल छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਰਾਮਾਵਤਾਰੇ ਕਥਾ ਸੁਬਾਹ ਮਰੀਚ ਬਧਹ ਜਗਯ ਸੰਪੂਰਨ ਕਰਨੰ ਸਮਾਪਤਮ ॥

End of the description of the story of the Killing of MARICH and SUBAHU and also the Completion of Yajna in Rama Avtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे रामावतार कथा सुबाह मरीच बधहु जग स्मपूरन करनं समापतम ॥


ਅਥ ਸੀਤਾ ਸੁਯੰਬਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the Swayyamvara of Sita :

अथ सीता सुय्मबर कथनं ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJNAG PRAYYAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਭਾਖਾ ਪਿੰਗਲ ਦੀ ॥

Bhakha Pingal Di (The language of prosody):

भाखा पिंगल की ॥


ਸੁੰਦਰੀ ਛੰਦ ॥

SUNDARI STANZA

सुंदरी छंद ॥


ਮਧੁਰ ਧੁਨਿ ਛੰਦ ॥

MADHUR DHUN STANZA

मधुर धनि छंद ॥


ਚਰਪਟ ਛੀਗਾ ਕੇ ਆਦਿ ਕ੍ਰਿਤ ਛੰਦ ॥

CHARPAT CHHIGA KE AAD KRIT STANZA

चरपट छीगा के आदि क्रित छंद ॥


ਪਰਸੁਰਾਮ ਬਾਚ ॥

The Speech of Parachuram :

परसराम बाच ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਕਬਿ ਬਾਚ ॥

Speech of the Poet:

कबि बाच ॥


ਪਰਸੁ ਰਾਮ ਬਾਚ ਰਾਮ ਸੋ ॥

Speech of Parashuram addressed to Ram :

परस राम बाच राम सो ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਪਰਸੁਰਾਮ ਸੋ ॥

Speech of Ram addressed to Parashuram:

राम बाच परसराम सो ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਪਰਸੁ ਰਾਮ ਬਾਚ ॥

Speech of Parashuram :

परस राम बाच ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਕਬਿ ਬਾਚ ॥

Speech of the Poet :

कबि बाच ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਰਾਮ ਜੁੱਧ ਜਯਤ ॥੨॥

End of the description of Ram’s victory in war.2.

इति स्री राम जु्ध जयत ॥२॥


ਅਥ ਅਉਧ ਪ੍ਰਵੇਸ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the Entry in Oudh :

अथ अउध प्रवेस कथनं ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਕਬਿੱਤ ॥

KABIT

कबि्त ॥


ਕਬਿੱਤ ॥

KABIT

कबि्त ॥


ਅਸ੍ਵ ਬਰਨਨੰ ॥

The description of horses :

अस्व बरननं ॥


ਕਬਿੱਤੁ ॥

KABIT

कबि्त ॥


ਦੋਧਕ ਛੰਦ ॥

DODHAK STANZA

दोधक छंद ॥


ਸਮਾਨਕਾ ਛੰਦ ॥

SAMAANKA STANZA

समानका छंद ॥


ਸਾਰਸੁਤੀ ਛੰਦ ॥

SARSWATI STANZA

सारसुती छंद ॥


ਨਗ ਸਰੂਪੀ ਛੰਦ ॥

NAG SWAROOPI STANZA

नग सरूपी छंद ॥


ਨਗ ਸਰੂਪੀ ਅੱਧਾ ਛੰਦ ॥

NAG SWAROOPI ARDH STANZA

नग सरूपी अधा छंद ॥


ਉਗਾਧ ਛੰਦ ॥

UGAADH STANZA

उगाध छंद ॥


ਕੇਕਈ ਬਾਚ ॥

The Speech of Kaikeyi:

केकई बाच ॥


ਉਗਾਥਾ ਛੰਦ ॥

UGAATHA STANZA

उगाथा छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਕੇਕਈ ਬਾਚ ਨ੍ਰਿਪੋ ਬਾਚ ॥

The speeches of Kaikeyi and the King.

केकई बाच न्रिपो बाच ॥


ਬਸਿਸਟ ਸੋਂ ॥

Addressed to Vasihthea :

बसिसट सों ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORTHA

सोरठा ॥


ਸੀਤਾ ਬਾਚ ਰਾਮ ਸੋਂ ॥

Speech of Sita addressed to Ram :

सीता बाच राम सों ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORTHA

सोरठा ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਸੀਤਾ ਪ੍ਰਤਿ ॥

Speech of Ram addressed to Sita :

राम बाच सीता प्रति ॥


ਮਨੋਹਰ ਛੰਦ ॥

MANOHAR STANZA

मनोहर छंद ॥


ਸੀਤਾ ਵਾਚ ਰਾਮ ਸੋਂ ॥

Speech of Sita addressed to Ram :

सीता वाच राम सों ॥


ਮਨੋਹਰ ਛੰਦ ॥

MANOHAR STANZA

मनोहर छंद ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਸੀਤਾ ਪ੍ਰਤਿ ॥

Speech of ram addressed to Sita :

राम वाच सीता प्रति ॥


ਲਛਮਣ ਬਾਚ ॥

Speech of Lakshman :

लछमण वाच ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਮਾਤਾ ਪ੍ਰਤਿ ॥

Speech of Ram addressed to the Mother :

राम बाच माता प्रति ॥


ਮਾਤਾ ਬਾਚ ਰਾਮ ਸੋਂ ॥

Speech of the Mother addressed to Ram:

माता बाच राम सों ॥


ਮਨੋਹਰ ਛੰਦ ॥

MANOHAR STANZA

मनोहर छंद ॥


ਸੁਮਿਤ੍ਰਾ ਬਾਚ ॥

Speech of Sumitra, Addressed to Lakshman :

सुमित्रा बाच ॥ लछमन सों ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਰਾਮ ਬਨਬਾਸ ਦੀਬੋ ॥

End of the description of Exile of Ram.

इति स्री राम बनबास दीबो ॥


ਅਥ ਬਨਬਾਸ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the Exile:

अथ बनबास कथनं ॥


ਸੀਤਾ ਅਨੁਮਾਨ ਬਾਚ ॥

Speect about the charm of Sita:

सीता अनुमान बाच ॥


ਬਿਜੈ ਛੰਦ ॥

BIJAI STANZA

बिजै छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਮਾਤਾ ਬਾਚ ॥

Speech of the Mother :

माता बाच ॥


ਕਬਿੱਤ ॥

KABIT

कबि्त ॥


ਅਪੂਰਬ ਛੰਦ ॥

APOORAV STANZA

अपूरब छंद ॥


ਭਰਥ ਬਾਚ ਕੇਕਈ ਸੋਂ ॥

Speech of Bharat addressed to Kaikeyi :

भरथ बाच केकई सों ॥


ਕੁਸਮ ਬਚਿਤ੍ਰ ਛੰਦ ॥

KUSMA BACCHITAR STANZA

कुसम बचित्र छंद ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਭਰਥ ਸੋਂ ॥

Speech of Ram addressed to Bharat :

राम बाच भरथ सों ॥


ਕੰਠ ਅਭੂਖਨ ਛੰਦ ॥

KANTH AABHUSHAN STANZA

कंठ अभूखन छंद ॥


ਭਰਥ ਬਾਚ ਰਾਮ ਪ੍ਰਤਿ ॥

Speech of Bharat addressed to Ram :

भरथ बाच राम प्रति ॥


ਕੰਠ ਅਭੂਖਨ ਛੰਦ ॥

KANTH AABHUSHAN STANZA

कंठ अभूखन छंद ॥


ਝੂਲਾ ਛੰਦ ॥

JHOOLA STANZA

झूला छंद ॥


ਝੂਲਨਾ ਛੰਦ ॥

JHOOLANA STANZA

झूलना छंद ॥


ਕਬਿੱਤ ॥

KABIT

कबि्त ॥


ਅਪੂਰਬ ਛੰਦ ॥

APOORAV STANZA

अपूरब छंद ॥


ਅਨੂਪ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

ANOOP NARAAJ STANZA

अनूप नराज छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਕਥਾ ਬਿਰਾਧ ਦਾਨਵ ਬਧਹ ॥

End of the description of killing of the demon VIRADH in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार कथा बिराध दानव बधह ॥


ਅਥ ਬਨ ਮੋ ਪ੍ਰਵੇਸ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description regarding entry in the forest :

अथ बन मो प्रवेस कथनं ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸੁਖਦਾ ਛੰਦ ॥

SUKHDA STANZA

सुखदा छंद ॥


ਸੁੰਦਰੀ ਛੰਦ ॥

SUNDARI STANZA

सुंदरी छंद ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ॥

Speech of Ram

राम बाच ॥


ਸੁੰਦਰੀ ਛੰਦ ॥

SUNDARI STANZA

सुंदरी छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ ਕਥਾ ਸੂਪਨਖਾ ਕੋ ਨਾਕ ਕਾਟਬੋ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੫॥

End of the chapter regarding the Chopping of the Nose of Surapanakha in the story of Rama Incarnation in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके राम अवतार कथा सूपनखा को नाक काटबो धयाइ समापतम सतु सुभम सतु ॥५॥


ਅਥ ਖਰਦੂਖਨ ਦਈਤ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

The beginning of the description of the battle with the demons Khar and Dusman :

अथ खरदूखन दईत जु्ध कथनं ॥


ਸੁੰਦਰੀ ਛੰਦ ॥

SUNDARI STANZA

सुंदरी छंद ॥


ਤਾਰਕਾ ਛੰਦ ॥

TAARKAA STANZA

तारका छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ ਕਥਾ ਖਰ ਦੂਖਣ ਦਈਤ ਬਧਹ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥੬॥

End of the story of the killing of KHAR and DUSHMAN in Ramvatar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके राम अवतार कथा खर दूखण दईत बधह धिआइ समापतम ॥६॥


ਅਥ ਸੀਤਾ ਹਰਨ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the abduction of Sita :

अथ सीता हरन कथनं ॥


ਮਨੋਹਰ ਛੰਦ ॥

MANOHAR STANZA

मनोहर छंद ॥


ਮਰੀਚ ਬਾਚ ॥

Speech of Marich :

मरीच बाच ॥


ਮਨੋਹਰ ਛੰਦ ॥

MANOHAR STANZA

मनोहर छंद ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ॥

Speech of Ram :

राम बाच ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਰਾਮ ਵਤਾਰ ਕਥਾ ਸੀਤਾ ਹਰਨ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

End of the chapter entitled ‘Abduction of Sita’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटक राम वतार कथा सीता हरन धिआइ समापतम ॥


ਅਥ ਸੀਤਾ ਖੋਜਬੋ ਕਥਨੰ ॥

Now begin the description about the search for Sita :

अथ सीता खोजबो कथनं ॥


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

TOTAK STANZA

तोटक छंद ॥


ਗੀਤਾ ਮਾਲਤੀ ਛੰਦ ॥

GEETA MALTI STANZA

गीता मालती छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਬਾਲ ਬਧਹ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥੮॥

End of the chapter entitled Killing of Bali’ in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे बालि बधह धिआइ समापतम ॥८॥


ਅਥ ਹਨੂਮਾਨ ਸੋਧ ਕੋ ਪਠੈਬੋ ॥

Now begins the description of sending of Hanuman in search of Sita :

अथ हनूमान सोध को पठैबो ॥


ਗੀਤਾ ਮਾਲਤੀ ਛੰਦ ॥

GEETA MALTI STANZA

गीता मालती छंद ॥


ਛਪਯ ਛੰਦ ॥

CHHAPAI STANZA

छपय छंद ॥


ਪ੍ਰਤਿ ਉੱਤਰ ਸੰਬਾਦ ॥

Responsive Dialogue :

प्रति उतर स्मबाद ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

CHHAPAI STANZA

छपै छंद ॥


ਰਾਵਨ ਬਾਚ ਅੰਗਦ ਸੋ ॥

Speech of Ravana addressed to Angad :

रावन बाच अंगद सो ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

CHHAPAI STANZA

छपै छंद ॥


ਮਦੋਦਰੀ ਬਾਚ ॥

The Speech of Mandodari :

मदोदरी बाच ॥


ਉਟੰਙਣ ਛੰਦ ॥

UTANGAN STANZA

उटंङण छंद ॥


ਰਾਵਣ ਬਾਚ ॥

Speech of Ravana :

रावण बाच ॥


ਮਦੋਦਰੀ ਬਾਚ ॥

Speech of Mandodari :

मदोदरी बाच ॥


ਰਾਵਣ ਬਾਚ ॥

Speech of Ravana :

रावण बाच ॥


ਮਦੋਦਰੀ ਬਾਚ ॥

Speech of Mandodari :

मदोदरी बाच ॥


ਰਾਵਣ ਬਾਚ ॥

Speech of Ravana :

रावण बाच ॥


ਸੰਗੀਤ ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

SANGEET CHHAPAI STANZA

संगीत छपै छंद ॥


ਇਤਿ ਦੇਵਾਂਤਕ ਨਰਾਂਤਕ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥੯॥

End of the chapter entitled ‘The Killin of Devantak Narantak’.

इति देवांतक नरांतक बधहि धिआइ समापतम ॥९॥


ਅਥ ਪ੍ਰਹਸਤ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the war with Prahasta :

अथ प्रहसत जु्ध कथनं ॥


ਸੰਗੀਤ ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

SANGEET CHHAPAI STANZA

संगीत छपै छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਬਭੀਛਣ ਬਾਚ ਰਾਮ ਸੋ ॥

Speech of Vibhishana addressed to Ram :

बभीछण बाच राम सो ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਬਿਰਾਜ ਛੰਦ ॥

BIRAAJ STANZA

बिराज छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਕੁੰਭਕਰਨ ਬਧਹਿ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End on the chapter entitled ‘The Killing of Kumbhkaran’ in Ramavtar in BACHHITTAR NATAK

इति स्री बचित्र नाटके रामवतारे कु्मभकरन बधहि धयाइ समापतमु ॥


ਅਥ ਤ੍ਰਿਮੁੰਡ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the war with Trimund :

अथ त्रिमुंड जु्ध कथनं ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਰਾਮਵਤਾਰ ਤ੍ਰਿਮੁੰਡ ਬਧਹ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End on the chapter entitled ‘The Killing of Trimund’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटक रामवतार त्रिमुंड बधहि धयाइ समापतम ॥


ਅਥ ਮਹੋਦਰ ਮੰਤ੍ਰੀ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begin the description of the war with the minister Mahodar :

अथ महोदर मंत्री जु्ध कथनं ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਮੋਹਣੀ ਛੰਦ ॥

MOHINI STANZA

मोहणी छंद ॥


ਨਵ ਨਾਮਕ ਛੰਦ ॥

NAV NAAMAK STANZA

नव नामक छंद ॥


ਤਿਲਕੜੀਆ ਛੰਦ ॥

TILKARIYA STANZA

तिलकड़ीआ छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਮਹੋਦਰ ਮੰਤ੍ਰੀ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End of the chapter entitled ‘The Killing of Mahodar Mantri’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार महोदर मंत्री बधहि धिआइ समापतम ॥


ਅਥ ਇੰਦ੍ਰਜੀਤ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of war with Inderjit :

अथ इंद्रजीत जु्ध कथनं ॥


ਸਿਰਖਿੰਡੀ ਛੰਦ ॥

SIRKHINDI STANZA

सिरखिंडी छंद ॥


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

PAADHARI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਇਤਿ ਇੰਦ੍ਰਜੀਤ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End of the chapter entitled “The Killing of Inderjit’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति इंद्रजीत बधहि धिआइ समापतम ॥


ਅਥ ਅਤਕਾਇ ਦਈਤ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the war with the demon Atkaaye :

अथ अतकाइ दईत जु्ध कथनं ॥


ਸੰਗੀਤ ਪਧਿਸਟਕਾ ਛੰਦ ॥

SANGEET PADHISTAKA STANZA

संगीत पधिसटका छंद ॥


ਹੋਹਾ ਛੰਦ ॥

HOHA STANZA

होहा छंद ॥


ਛਪੈ ਛੰਦ ॥

CHHAPAI STANZA

छपै छंद ॥


ਅਜਬਾ ਛੰਦ ॥

AJBA STANZA

अजबा छंद ॥


ਪਾਧਰੀ ਛੰਦ ॥

PAADHARI STANZA

पाधरी छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਅਤਕਾਇ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥੧੪॥

End of the chapter entitled ‘Killing of Atkaaye’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार अतकाइ बधहि धिआइ समापतम ॥१४॥


ਅਥ ਮਕਰਾਛ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the war with Makrachh :

अथ मकराछ जु्ध कथनं ॥


ਪਾਧਰੀ ਛੰਦ ॥

PAADHRI STANZA

पाधड़ी छंद ॥


ਇਤਿ ਮਰਾਛ ਬਧਹ ॥

इति मराछ बधह ॥


ਅਜਬਾ ਛੰਦ ॥

AJBA STANZA

अजबा छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਮਕਰਾਛ ਕੁੰਭ ਅਨਕੁੰਭ ਬਧਹਿ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End of the chapter entitled ‘Killing of Makrachh, Kumbh and Ankumbh’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार मकराछ कु्मभ अनकु्मभ बधहि धयाइ समापतम ॥


ਅਥ ਰਾਵਨ ਜੁੱਧ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the war with Ravna :

अथ रावन जु्ध कथनं ॥


ਹੋਹਾ ਛੰਦ ॥

HOHA STANZA

होहा छंद ॥


ਤ੍ਰਿਣਣਿਣ ਛੰਦ ॥

TRINANIN STANZA

त्रिणणिण छंद ॥


ਤ੍ਰਿਗਤਾ ਛੰਦ ॥

TRIGTAA STANZA

त्रिगता छंद ॥


ਅਨਾਦ ਛੰਦ ॥

ANAAD STANZA

अनाद छंद ॥


ਬਹੜਾ ਛੰਦ ॥

BAHRAA STANZA

बहड़ा छंद ॥


ਸੰਗੀਤ ਬਹੜਾ ਛੰਦ ॥

SANGEET BAHRA STANZA

संगीत बहड़ा छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਲਛਮਨ ਮੂਰਛਨਾ ਭਵੇਤ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End of the chapter entitled ‘Lakshman becoming Unconscious’ in Ramvtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार लछमन मूरछना भवेत धिआइ समापतम ॥


ਸੰਗੀਤ ਬਹੜਾ ਛੰਦ ॥

SANGEET BAHRAA STANZA

संगीत बहड़ा छंद ॥


ਅਰਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

ARDH NARAAJ STANZA

अरध नराज छंद ॥


ਅਨੂਪ ਨਿਰਾਜ ਛੰਦ ॥

ANOOP NIRAAJ STANZA

अनूप निराज छंद ॥


ਸੰਗੀਤ ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

SANGEET BHUJANG PRAYAAT STANZA

संगीत भुजंग प्रयात छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलसि ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਕਲਸ ॥

KALAS

कलस ॥


ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

TRIBHANGI STANZA

त्रिभंगी छंद ॥


ਚੌਬੋਲਾ ਛੰਦ ॥

CHABOLA STANZA

चबोला छंद ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਅਨੰਤਤੁਕਾ ॥

(OF INNUMERABLE VERSES)

अनंततुका ॥


ਚੌਬੋਲਾ ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

CHABOLA SWAYYA

चौबोला स्वैया ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ਛੰਦ ॥

SWAYYA STANZA

स्वैया छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਦਸ ਸਿਰ ਬਧਹ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ॥

End of the chapter entitled ‘Killing of the Ten-headed (Ravana) in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार दस सिर बधह धिआइ समापतम ॥


ਅਥ ਮਦੋਦਰੀ ਸਮੋਧ ਬਭੀਛਨ ਕੋ ਲੰਕ ਰਾਜ ਦੀਬੋ ॥

Now begins the description of contemporaneous knowledge to Mandodari and the bestowal of the kingdom of Lanka to Vibhishana:

अथ मंदोदरी समोध बभीछन को लंक राज दीबो ॥


ਸੀਤਾ ਮਿਲਬੋ ਕਥਨੰ ॥

Description of the Union with Sita :

सीता मिलबो कथनं ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ਛੰਦ ॥

SWAYYA STANZA

स्वैया छंद ॥


ਅਲਕਾ ਛੰਦ ॥

ALKA STANZA

अलका छंद ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਮਦੋਦਰੀ ਪ੍ਰਤਿ ॥

The speech of Ram addressed to Mandodari :

राम बाच मदोदरी प्रति ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਬਭੀਛਨ ਕੋ ਲੰਕਾ ਕੋ ਰਾਜ ਦੀਬੋ ਮਦੋਦਰੀ ਸਮੋਧ ਕੀਬੋ ਸੀਤਾ ਮਿਲਬੋ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥੧੮॥

End of the chapter entitled The Bestowal of Kingdom on Vibhishan, Imparting of Contemporaneous Knowledge to Mandodari and the Union with Sita’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामवतार बभीछन को लंका को राज दीबो मदोदरी समोध कीबो सीता मिलबो धयाइ समापतं ॥१८॥


ਅਥ ਅਉਧਪੁਰੀ ਕੋ ਚਲਬੋ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of the entry into Ayodhya :

अथ अउधपुरी को चलबो कथनं ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASAAVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਮਕਰਾ ਛੰਦ ॥

MAKRA STANZA

मकरा छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ ਸੀਤਾ ਅਯੁਧਿਆ ਆਗਮ ਨਾਮ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥

End of the chapter entitled ‘The Entry of Sita in Ayodhya’ in Ramvatar.

इति स्री राम अवतार सीता अयुधिआ आगम नाम धिआइ समापतं ॥


ਅਥ ਮਾਤਾ ਮਿਲਣੰ ॥

Now begins the description of the Meeting with the Mother :

अथ माता मिलणं ॥


ਰਸਾਵਲ ਛੰਦ ॥

RASSVAL STANZA

रसावल छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਅਨੰਤ ਤੁਕਾ ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

ANANT-TUKA BHUJANG PRAYAAT STANZA

अनंत तुका भुजंग प्रयात छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਮ੍ਰਿਤਗਤ ਛੰਦ ॥

MRITGAT STANZA

म्रितगत छंद ॥


ਅਨਕਾ ਛੰਦ ॥

ANKA STANZA

अनका छंद ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਅਥ ਸੀਤਾ ਕੋ ਬਨਬਾਸ ਦੀਬੋ ॥

Now begins the description about the Exile of Sita :

अथ सीता को बनबास दीबो ॥


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

It happened then like this and on this side Ram said to Sita with love:

भजंग प्रयात छंद ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਦੁਇ ਪੁਤ੍ਰ ਉਤਪੰਨੇ ਧਯਾਇ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥੨੧॥

End of the chapter entitled ‘The Birth of two Sons’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.21.

इति स्री बचित्र नाटके ग्रंथे रामवतार दुइ पुत्र उतपंने धिआइ समापतं ॥२१॥


ਅਥ ਜਗ੍ਯ੍ਯਾਰੰਭ ਕਥਨੰ ॥

अथ जगयारमभ कथनं


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

भुजंग प्रयात छंद ॥


ਚਾਚਰੀ ਛੰਦ ॥

CHAACHARI STANZA

चाचरी छंद ॥


ਇਤਿ ਲਵ ਬਾਧਵੋ ਸਤ੍ਰੁਘਣ ਬਧਹਿ ਸਮਾਪਤ ॥

इति लव बाधवो सत्रघण बधहि समापतं ॥


ਅਥ ਲਛਮਨ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ लछमण जुध कथनं


ਅਣਕਾ ਛੰਦ ॥

ANKA STANZA

अणका छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਅਣਕਾ ਛੰਦ ॥

ANKA STANZA

अणका छंद ॥


ਲਛਮਨ ਬਾਚ ਸਿਸ ਸੋ ॥

The speech of Lakshman addressed to the boys :

लछमन बाच सिस सो ॥


ਅਣਕਾ ਛੰਦ ॥

ANKA STANZA

अणका छंद ॥


ਅਜਬਾ ਛੰਦ ॥

AJBA STANZA

अजबा छंद ॥


ਅਪੂਰਬ ਛੰਦ ॥

APOORAB STANZA

अपूरब छंद ॥


ਇਤਿ ਲਛਮਨ ਬਧਹਿ ਸਮਾਪਤੰ ॥

End of the chapter entitled ‘Killing of Lakshman’ in Ramvtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामावतारे लछमन बधहि धिआइ समापतं ॥


ਅਥ ਭਰਥ ਜੁਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ भरथ जुध कथनं


ਅੜੂਹਾ ਛੰਦ ॥

AROOHAA STANZA

अड़ूहा छंद ॥


ਭਰਥ ਬਾਚ ਲਵ ਸੋ ॥

Speech of Bharat addressed to Lava :

भरथ बाच लव सो ॥


ਅਕੜਾ ਛੰਦ ॥

AKRAA STANZA

अकड़ा छंद ॥


ਬਹੋੜਾ ਛੰਦ ॥

BAHORA STANZA

बहोड़ा छंद ॥


ਅਨੂਪ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

ANOOP NIRAAJ STANZA

अनूप निराज छंद ॥


ਪਪਾਤ ਅੰਗਦ ਕੇਸਰੀ ਹਨੂ ਵ ਸੁਗ੍ਰਿਵੰ ਬਲੰ ॥੭੯੦॥

The sharp sword of white edges were struck in the battlefield, the strength of Angad, Hanuman, Sugriva etc. began to wean away.790.

पपात अंगद केसरी हनू व सुग्रिवं बलं ॥७९०॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਾਵਤਾਰੇ ਭਰਥ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटके रामावतारे भरथ बधहि धिआइ समापतं ॥


ਅਨੂਪ ਨਰਾਜ ਛੰਦ

ANOOP NIRAAJ STANZA

अनूप नराज छंद


ਤਿਲਕਾ ਛੰਦ ॥

TILKA STANZA

तिलका छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਅਕਰਾ ਛੰਦ ॥

AKRAA STANZA

अकरा छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰ ਲਵ ਬਾਜ ਬਾਂਧਵੇ ਰਾਮ ਬਧਹ ॥

इति स्री बचित्र नाटके रामवतारे लव बाज बांधवे राम बधह धिआइ समापतं ॥


ਅਥ ਸੀਤਾ ਨੇ ਸਭ ਜੀਵਾਏ ਕਥਨੰ ॥

The description of the Revival of all by Sita :

अथ सीता ने सभ जीवाए कथनं ॥


ਸੀਤਾ ਬਾਚ ਪੁਤ੍ਰਨ ਸੋ ॥

The description of the Revival of all by Sita :

सीता बाच पुत्रन सों


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਅਰੂਪਾ ਛੰਦ ॥

AROOPA STANZA

अरूपा छंद ॥


ਸੀਤਾ ਬਾਚ ਮਨ ਮੈ ॥

Address of Sita to her mind :

सीता बाच मन मै ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਅਰੂਪਾ ਛੰਦ ॥

AROOPA STANZA

अरूपा छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਰਾਮਵਤਾਰੇ ਤਿਹੂ ਭਿਰਾਤਨ ਸੈਨਾ ਸਹਿਤ ਜੀਬੋ ॥

End of the chapter entitled The Reanimation of the Three Brothers alongwith their forces in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटके रामावतारे तिहू भिरातन सैना सहित जीबो धिआइ समापतं ॥


ਸੀਤਾ ਦੁਹੂ ਪੁਤ੍ਰਨ ਸਹਿਤ ਪੁਰੀ ਅਵਧ ਪ੍ਰਵੇਸ ਕਥਨੰ ॥

The description of the Entry of Sita alongwith her two sons in Oudhpuri :

अथ सीता दुहू पुत्रन सहित पुरी अवध प्रवेस कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ਛੰਦ ॥

CHAUPAI STANZA

चौपई छंद ॥


ਦੋਹਰਾ ਛੰਦ ॥

DOHRA STANZA

दोहरा छंद ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਰਾਮ ਬਾਚ ਮਨ ਮੈ ॥

Speed of Ram in his mind :

राम बाच मन मै ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਰਾਮਵਤਾਰੇ ਸੀਤਾ ਕੇ ਹੇਤ ਮ੍ਰਿਤ ਲੋਕ ਸੇ ਗਏ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥

End of the chapter entitled ‘Forsaking the abode of Death for Sita’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति स्री बचित्र नाटक रामावतारे सीता के हेत म्रित लोक गए धिआइ समापतं ॥


ਅਥ ਤੀਨੋ ਭ੍ਰਾਤਾ ਤ੍ਰੀਅਨ ਸਹਿਤ ਮਰਬੋ ਕਥਨੰ ॥

The description of the Death of the Three Brothers alongwith their wives :

अथ तीनो भ्राता त्रीअन सहित मरबो कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਰਾਮ ਭਿਰਾਤ ਤ੍ਰੀਅਨ ਸਹਿਤ ਸੁਰਗ ਗਏ ਅਰ ਸਗਰੀ ਪੁਰੀ ਸਹਿਤ ਸੁਰਗ ਗਏ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

End of the chapter entitled ‘Ram went to Heaven alongwith brothers and their wives He went alongwith all the residents of the city’ in Ramavtar in BACHITTAR NATAK.

इति राम भिरात त्रीअन सहित सुरगि गए अरु राम सगरी पुरी सहित सुरग जाइबो धिआइ समापतं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਰਾਮਾਇਣ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

BENIGN END OF THE RAMAYANA.

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे रामाइण समापतम ॥


ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰ ॥

CHAUBIS AVTAR(Contd.)

क्रिशनावतार ॥


ੴ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਿਹ ॥

The Lord is one and the Victory is of the Lord.

चौबीस अउतार


ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

The Lord is one and the Victory is of the Lord.

वाहिगुरू जी की फ़तह ॥


ਅਥ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰ ਇਕੀਸਮੋ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of KRISHNA INCARNATION, the twenty-first incarnation

अथ क्रिशनावतार इकीसमो अवतार कथनं ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

चौपई ॥


ਅਥ ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description in praise of the goddess

अथ देवी जू की उसतत कथनं ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबितु ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤਿ ਸਮਾਪਤੰ ॥

End of the praise of the goddess,

इति स्री देवी जू की उसतति समापतम ॥


ਅਥ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਬ੍ਰਹਮਾ ਪਹਿ ਪੁਕਾਰਤ ਭਈ ॥

Earth’s prayer to Brahma:

अथ प्रिथमी ब्रहमा पहि पुकारत भई ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਾਚ ॥

Speech of the lord:

ब्रहम बाच ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰ ਹ੍ਵੈਬੋ ਬਰਨਨੰ ਸਮਾਪਤੰ ॥

End of the description about the decision of Vishnu to incarnate.

इति स्री बिशन अवतार ह्वैबो बरननं ॥


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਜਨਮ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description about the Birth of Devaki

अथ देवकी को जनम कथनं ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਇਤਿ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਜਨਮ ਬਰਨਨੰ ਪ੍ਰਿਥਮ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

End of the first Chapter regarding the description about the Birth of Devaki.

इति देवकी को जनम बरननं प्रिथम धिआइ समापतम सतु ॥


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਬਰੁ ਢੂੰਢਬੋ ਕਥਨੰ ॥

Now Begins the description about the search of the match for Devaki

अथ देवकी को बर ढूंढबो कथनं ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबितु ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਬ੍ਯਾਹ ਕਥਨੰ ॥

Description of the Marriage of Devaki

अथ देवकी को बयाह कथनं ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸੋਰਠਾ ॥

SORTHA

सोरठा ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबि्तु ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबि्तु ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਨਭਿ ਬਾਨੀ ਬਾਚ ਕੰਸ ਸੋ ॥

The heavenly speech addressed to Kansa:

नभि बानी बाच कंस सों ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबि्तु ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਬਾਸੁਦੇਵ ਬਾਚ ਕੰਸ ਸੋ ॥

Speech of Vasudev addressed to Kansa:

बासदेव बाच कंस सो ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਕੰਸ ਬਾਚ ਮਨ ਮੈ ॥

Speech of Kansa in his mind:

कंस बाच मन मै ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਬਸੁਦੇਵ ਕੈਦ ਕੀਬੋ ॥

Description about the Imprisonment of Devaki and Vasudev

अथ देवकी बसदेव कैद कीबो ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

Speech of the poet: DOHRA

कबियो बाच ॥ दोहरा ॥


ਪ੍ਰਥਮ ਪੁਤ੍ਰ ਦੇਵਕੀ ਕੇ ਜਨਮ ਕਥਨੰ ॥

Description of the birth of the first son of Devaki

प्रथम पुत्र देवकी के जनम कथनं ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਬਸੁਦੇਵ ਬਾਚ ਮਨ ਮੈ ॥

Speech of Vasudev in his mind:

बसदेव बाच मन मै ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਨਾਰਦ ਰਿਖਿ ਬਾਚ ਕੰਸ ਪ੍ਰਤਿ ॥

Speech of the sage Narada address to Kansa:

नारद रिख बाच कंस प्रति ॥


ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

दोहरा ॥


ਅਥ ਭ੍ਰਿਤਨ ਸੌ ਕੰਸ ਬਾਚ ॥

Speech of Kansa address to his servants:

अथ भ्रितान सौ कंस बाच ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया


ਪ੍ਰਿਥਮ ਪੁਤ੍ਰ ਬਧਹਿ ॥

Killing of the first son

प्रिथम पुत्र बधहि ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबि्तु ॥


ਸਵੈਯਾ ॥

SWAYYA

स्वैया ॥


ਦੇਵਕੀ ਬੇਨਤੀ ਬਾਚ ॥

Speech regarding the supplication of Devaki:

दोवकी बेनती बाच ॥


ਕਬਿਤੁ ॥

KABIT

कबि्तु ॥


ਇਤਿ ਛਠਵੋਂ ਪੁਤ੍ਰ ਬਧਹ ॥

End of the description regarding the killing of the sixth son.

इति छटवों पुत्र बधह ॥