. Sri Dasam Granth Sahib Verse
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Sri Dasam Granth Sahib Verse

ਮਹਿਖੀ ਚਾਰਿ ਨਿਤਿ ਗ੍ਰਿਹ ਆਵੈ ॥

महिखी चारि निति ग्रिह आवै ॥


ਰਾਂਝਾ ਅਪਨੋ ਨਾਮ ਸਦਾਵੈ ॥

He used to come back in the evening after grazing the cattle and became known as Ranjah.

रांझा अपनो नाम सदावै ॥


ਪੂਤ ਜਾਟ ਕੋ ਤਿਹ ਸਭ ਜਾਨੈ ॥

पूत जाट को तिह सभ जानै ॥


ਰਾਜਪੂਤੁ ਕੈ ਕੋ ਪਹਿਚਾਨੈ ॥੯॥

Every body thought him to be the son of a Jat and none acknowledged him as the son of a Raja.(9)

राजपूतु कै को पहिचानै ॥९॥